June 18 ,2021

PS24 News
मीडिया का नया अवतार
हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2015/65733 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2016/71238 (दैनिक)
RNI - UPHIN/2017/75145 (मासिक)
Download App

Trending
  • खेल
    img1

    टी20 विश्व कप में 100 फीसदी फिट होकर करेंगे ये काम

    Read More
  • शिक्षा व स्वास्थ्य
    img1

    इस समस्या से जूझ रहे पुरुष सोने से पहले चबा लें 3 लौंग,

    Read More
  • मनोरंजन
    img1

    सुनील ग्रोवर की एक्टिंग की हुई तारीफ

    Read More
  • शिक्षा व स्वास्थ्य
    img1

    बच्चे की आंखों में काजल लगाना सही या गलत

    Read More
  • शिक्षा व स्वास्थ्य
    img1

    रात को ब्रा पहन कर सोना चाहिए या नहीं

    Read More
  • मनोरंजन
    img1

    कृति सेनन ने याद की राब्ता में काम

    Read More
  • शिक्षा व स्वास्थ्य
    img1

    पीरियड्स मिस होने से भी पहले शरीर देता है ऐसे संके

    Read More
  • खेल
    img1

    विराट कोहली से विवाद पर बोले एमएसके प्रसाद

    Read More

टी20 विश्व कप में 100 फीसदी फिट होकर करेंगे ये काम


हार्दिक पंड्या बतौर ऑलराउंडर टीम में खेलते हैं, लेकिन बीते कुछ महीनों में उनका गेंदबाजी न करना चर्चा का विषय बना हुआ है. इसका करण उनकी फिटनेस है जिसके चलते वह गेंदबाजी नहीं कर पा रहे हैं. पीठ की समस्या और कंधे की चोट से पंड्या काफी परेशान रहे हैं. उन्होंने आईपीएल-2021 के स्थगित होने तक गेंदबाजी नहीं की थी. वह कब इंटरनेशल स्तर पर गेंदबाजी करेंगे ये बात चर्चा का विषय है. पंड्या को श्रीलंका दौरे के लिए टीम में चुना गया है. इसी साल टी20 विश्व कप भी होना है और पंड्या को पता है कि उन्हें टीम में अपना योगदान देना होगा, सिर्फ बल्ले से नहीं बल्कि गेंद से भी और उनका पूरा ध्यान टी20 विश्व कप पर ही है.
पंड्या आईसीसी टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते हैं. बायो-बबल में लगातार अंदर-बाहर हो रहे पंड्या काफी मेहनत कर रहे हैं. उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया पोडकास्ट पर कहा, “मेरे लिए, मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं और मैं ऐसा कर सकूंगा, कि मैं टी20 विश्व कप के सभी मैचों में गेंदबाजी करूंगा. मैं बस थोड़ा स्मार्ट बनने की कोशिश कर रहा हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं इसे मिस न करूं. मेरा पूरा ध्यान विश्व कप पर है.”
पूरी तरह से फिट रहने की जरूरत
पंड्या को पता है कि उन्हें अपने चार ओवर अच्छे से करने के लिए पूरी तरह से फिट रहना होगा. उन्होंने इस बात को माना कि उनके लिए फिट रहना काफी अहम होगा. पंड्या ने कहा, “हां, गेंदबाजी को लेकर, मायने रखता है कि मैं कितना फिट हूं. मेरी सर्जरी के बाद भी, मैंने अपनी गति नहीं खोई है. मेरी गेंदबाजी मेरी फिटनेस से संबंधित है. मैं जितना फिट रहूंगा मैं उतना बेहतर कर सकूंगा. मैं जब भी खेलना चाहता हूं, पूरा 100 फीसदी फिट होकर खेलना चाहता हूं, 50 फीसदी फिट रहते हुए नहीं.”
आईपीएल-2021 में नहीं की गेंदबाजी
पंड्या ने आईपीएल-2021 में एक भी गेंद नहीं फेंकी. यह बताता है कि उन्हें गेंदबाजी करने में समस्या आ रही है. वह साथ ही बल्ले से भी कुछ खास नहीं कर पाए. आईपीएल-2021 स्थगित होने से पहले पंड्या ने सात मैच खेले और 8.66 की औसत से सिर्फ 52 रन बनाए. 
पंड्या वैसे भी लंबे अरसे से टेस्ट नहीं खेले हैं. उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ 30 अगस्त से 2 सितंबर के बीच साउथैम्पटन में खेला था. तब से टेस्ट मैच नहीं खेले हैं. उन्होंने अभी तक भारत के लिए 11 टेस्ट मैच खेले हैं और 17 विकेट के साथ 532 रन बनाए हैं.

इस समस्या से जूझ रहे पुरुष सोने से पहले चबा लें 3 लौंग,


नई दिल्लीं भारतीय रसोई में लौंग का इस्तेमाल भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन यह सेहत के लिहाज से भी बहुत फायदेमंद है. आयुर्वेद में लौंग का इस्तेमाल जड़ी-बूटी के रूप किया जाता है. इसके सेवन से भूख बढ़ती है, उल्टी रुकती है, पेट की गैस, अत्यधित प्यास लगने की समस्या और कफ-पित्त दोष ठीक होते हैं. साथ ही जिन्हें पेट फूलने जैसी दिक्कतें होती हैं, उनके लिए भी लौंग फायदेमंद है.जाने-माने आयुर्वेद एक्सपर्ट्स डॉ. अबरार मुल्तानी की मानें तो लौंग आपके पाचन स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है. लौंग पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ाती है, जो कब्ज और अपच जैसे पाचन संबंधी विकारों को रोकती है. लौंग का सेवन पुरुषों के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है. इससे यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं ठीक होती हैं.
क्या कहते हैं डॉ. अबरार मुल्तानी
आयुर्वेद डॉ. अबरार मुल्तानी कहते हैं कि लौंग में विटमिन-ठ1एठ2एठ4ए ठ6एठ9 और विटमिन-सी तथा बीटा कैरोटीन जैसे तत्व शामिल हैं. इसके अलावा विटमिन-के, प्रोटीन, कार्बाेहाइड्रेट जैसे कई तत्व भी हमें लौंग से मिलते हैं. यह सभी एक स्वस्थ्य शरीर के लिए बेहद लाभकारी हैं.
रोज 3 लौंग का करें सेवन
एक शोध में किए गए दावे पर नजर डालें तो रोज सुबह 3 लौंग को खाली पेट खाना चाहिए. रात को सोने से पहले भी लौंग का सेवन कर सकते हैं. इससे सेक्स लाइफ में सुधार होता है.
पुरुषों के लिए फायदेमंद है लौंग
लौंग का नियमित सेवन करने से यौन संबंधित समस्या से राहत मिलती है. इसके नियमित सेवन से शीघ्रपतन जैसी दिक्कतों से पुरुषों को मुक्ति मिलती है. साथ ही यह स्पर्म काउंट बढ़ाने में मददगार है.
रात को सोने से पहले करें सेवन
आयुर्वेद डॉ. अबरार मुल्तानी की मानें तो अगर आप रोज रात को सोते समय 3 लौंग खाकर एक गिलास गुनगुना पानी पी लेते हैं, तो इससे पेट संबंधी कई रोग दूर हो जाते हैं.

सुनील ग्रोवर की एक्टिंग की हुई तारीफ

जी5 पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘सनफ्लावर’ का निर्देशन किया है फिल्मकार विकास बहल ने, जिनका नाम यौन उत्पीड़न के एक केस में सामने आया था. फिलहाल, इस मामले में विकास की छवि साफ हो चुकी है और वह ‘सनफ्लावर’ के साथ एक बार फिर से दर्शकों के लिए मनोरंजक कंटेंट लेकर आए हैं. विकास बहल के साथ इसे राहुल सेनगुप्ता ने भी डायरेक्ट किया है. इस सीरीज की कहानी एक मर्डर मिस्ट्री के ईर्द-गिर्द घूमती है. एक शव और दो संदिग्ध. यह तो स्पष्ट है कि एक शख्स अपनी बातों से संदिग्ध नजर आता है और दूसरा अपनी हरकतों से. क्या ये दोनों संदिग्ध सनफ्लावर सोसायटी में हुई राज कपूर की हत्या में शामिल हैं? क्या वे सिर्फ सामान्य संदिग्ध हैं और जो सामने दिख रहा है, उसके अलावा भी बहुत कुछ है? इस तरह के सवाल वेब सीरीज ‘सनफ्लावर’ देखने के बाद आपके भी जहन में आ सकते हैं. विकास बहल ने इस सीरीज में शुरुआत से ही सस्पेंस क्रिएट करने की कोशिश की है. सुनील ग्रोवर, आशीष विद्यार्थी , रणवीर शौरे जैसे कलाकारों द्वारा निर्मित इस सीरीज से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन क्या उनकी उम्मीदों पर कलाकार खरे उतर पाए और क्या कहती है इस थ्रिलर सीरीज की कहनी, यह सब जानेंगे आज के रिव्यू में.
क्या है सीरीज की कहानी?
रेसिडेंशियल एरिया में पड़ोसियों के साथ झगड़े आम बता हैं, लेकिन अगर इन झगड़ों के चलते किसी की हत्या हो जाए, तो यह कोई आम बात नहीं है. ऐसी ही कहानी है वेब सीरीज ‘सनफ्लावर’ की. मुंबई में एक रेसिडेंशियल सोसायटी है, जिसका नाम सनफ्लावर है. इस सोसायटी में हर वर्ग और हर समुदाय के लोग रहते हैं, जिन्हें एक दूसरे से किसी न किसी वजह से समस्या है. सीरीज की कहानी शुरू होती है एक नारियल पानी से. एक फ्लैट के बाहर नारियल पानी रखा है और एक पड़ोसी उसमें कुछ मिला देता है. वह पड़ोसी है- डॉ. आहूजा (मुकुल चड्ढा), जो एक यूनिवर्सिटी में लेक्चरर है.
उसके सामने वाले फ्लैट में रहते हैं- राज कपूर. अरे रुकिए३ ‘आवारा’ वाले राज कपूर नहीं. सोसायटी वाले राज कपूर तो एक बिजनेसमैन हैं. राज कपूर से उनके पड़ोसी आहूजा का अक्सर किसी न किसी बात पर झगड़ा होता है, खासकर पार्किंग को लेकर. राज कपूर को सबक सिखाने के लिए आहूजा उसके नारियल पानी में कुछ मिला देता है. अब राज कपूर वह नारियल पानी पी लेता है और उसे पीने के बाद वह टॉयलेट पॉट पर बैठा-बैठा ही परलोक सिधार लेता है.
अब सोसायटी में एंट्री होती है पुलिस की. दिगेंद्र (रणवीर शौरे) के नेतृत्व में और तांबे (गिरीश कुलकर्णी) द्वारा इस हत्या की गुत्थी सुलझाने की जद्दोजहद शुरू होती है. संदेह की सुई राज कपूर की घरेलू हाउस हेल्पर और उसके पड़ोसी आहूजा पर जा टिकती है. पुलिस की नजर में सोनू सिंह (सुनील ग्रोवर) सबसे बड़ा संदिग्ध उस समय बन जाता है, जब पुलिस सोसायटी के सीसीटीवी फुटेज में उसकी अजीबों-गरीब हरकतें पकड़ती है.
सोनू, 35 वर्षीय व्यक्ति के शरीर में फंसा हुआ एक किशोर प्रतीत होता है, जिसके साथ महिलाएं लिफ्ट साझा करने में संकोच कर सकती हैं. वह लड़कियों की तरफ आकर्षित होता है, लेकिन उसे कोई भी भाव नहीं देती. हालांकि, जब नौकरी की बात आती है, तो सोनू काम में मेहनती साबित होता है, लेकिन उसमें सामाजिक कौशल का पूरी तरह से अभाव है. एक के बाद एक हत्या के सबूत सोनू सिंह और आहूजा को मुजरिम ठहराने की तरफ इशारा करते हैं. पर ऐसा कुछ है जो पुलिस को इन्हें गिरफ्तार करने से रोकता है? अब वह क्या है, इसके लिए आपको ‘सनफ्लावर’ वेब सीरीज देखनी होगी.
अभिनय
‘सनफ्लावर’ की कहानी थोड़ी बोर करती है, लेकिन इसके किरदार अपने अभिनय से कहानी को दिलचस्प बनाने में कामयाब हुए. सुनील ग्रोवर ने बहुत ही कुशलता के साथ अपने किरदार को निभाया. अक्सर हमने सुनील को हास्य किरदारों में देखा है, लेकिन इस सीरीज में आप उनकी एक्टिंग से काफी हैरान होने वाले हैं. मुकुल चड्डा ने एक लेक्चरर और एक शॉर्ट टेंपर्ड शख्स आहूजा के किरदार को बहुत प्रभावशाली तरीके से निभाया.
रणवीर शौरे ने एक चतुर पुलिस अधिकारी की भूमिका बखूबी निभाई है. सीरीज में कहीं भी रणवीर को स्माइल करते हुए नहीं दिखाया गया. उन्होंने एक ऐसे पुलिस वाले की भूमिका निभाई है, जिसके दिमाग में हत्या की गुत्थी सुलझाने का जुनून सवार रहता है. गिरीश कुलकर्णी ने पुलिस इंस्पेक्टर तांबे के रोल को मजेदार रुख दिया है. एक ऐसा इंस्पेक्टर जिसके पास केस सुलझाने और अपनी महिला मित्रों को देने का पूरा समय है.
वहीं, आशीष विद्यार्थी की बात करें, तो एक सोसायटी के सदस्य के रूप में वह हर किसी को अपनी नजरों से नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए नजर आते हैं. वह सोसायटी के चेयरमैन बनना चाहते हैं. एक ऐसा चेयरमैन जिसके नेतृत्व में मुस्लिमों, समलैंगिकों, किन्नरों और दो-तीन शादी कर चुके लोगों के लिए सोसायटी में कोई जगह नहीं है. इस सीरीज में हर किरदार को किसी न किसी प्रकार से अलग दिखाने की बखूबी कोशिश की गई और सभी कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया.

बच्चे की आंखों में काजल लगाना सही या गलत


दादी-नानी के जमाने से बच्चों की आंखों में काजल लगाने का रिवाज चला आ रहा है।वक्त के साथ काजल और उसे लगाने के तरीकों में भी कई तरह के बदलाव आए। लेकिन आज भी कई परिवारों में बच्चों की आंखों में काजल डालना बदस्तूर जारी है। इसके पीछे मान्यता यह है कि काजल लगाने से बच्चे को नजर नहीं लगती और आंखें बढ़ी होती हैं। लेकिन डाक्टरों की राय इसके बिल्कुल उलट है। डॉक्टरों की मानें तो आंखों में काजल लगाना शिशु के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। आइए जानते हैं कैसे।
बच्चों के क्यों नहीं लगाना चाहिए काजल-
काजल बनाने के लिए 50 प्रतिशत से ज्यादा लीड का इस्तेमाल किया जाता है। लीड सेहत के लिए बहुत हानिकारक तत्व है। यह किडनी, मस्तिष्क, बोन मैरो और शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। यदि खून में लीड का स्तर बढ़ जाए, तो इससे व्यक्ति कोमा तक में जा सकता है, उसे बेहोशी और ऐंठन हो सकती है। यहां तक कि उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
शिशु पर काजल का प्रभाव-
चूंकि, बच्चे का शरीर अभी विकसित हो रहा होता है, ऐसे में लीड के संपर्क में आने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
घर पर बना काजल कितना सेफ-
घर पर बना काजल प्राकृतिक होता है।
यही वजह है कि इसे बच्चों की आंखों पर लगाने के लिए यह तर्क दिया जाता है कि घर में बने काजल का उपयोग करना सुरक्षित है जबकि डॉक्टरों की राय में यह भी सही नहीं है। आमतौर पर काजल को शिशु की आंखों पर उंगली से लगाया जाता है। इसकी वजह से बच्चे की आंखों में संक्रमण हो सकता है।
आंखों में काजल लगाने को लेकर ये हैं कुछ मिथ और सच्चाई-
-मिथ-रोजाना बच्चे की आंखों पर अगर काजल लगाया जाए तो उसकी आंखें और पलकें बड़ी होती हैं।
-सच्चाई-काजल लगाने से बच्चे की आंखें बड़ी नहीं होती हैं।
 मिथ-काजल लगाने से बच्चा देर तक सो सकता है। 
सच्चाई- काजल को लेकर अभी तक कोई ऐसा शोध सामने नहीं आया है, जो इस बात की पुष्टि करे। आमतौर पर हर शिशु रोजाना 18 से 19 घंटे तक सोता है।
मिथ-घर का बना काजल सुरक्षित है?
सच्चाई- घर का बना काजल बाजार में मिलने वाले बाकी कमर्शियल काजल से तो बेहतर हो सकता है 
बावजूद इसके इसमें मौजूद कार्बन बच्चों की आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसके अलावा इस काजल को बच्चे की आंखों में सीधे उंगली से लगाने की वजह से यह आंख में संक्रमण का कारण भी बन सकता है।
मिथ-बुरी नजर से बचाता है काजल।
सच्चाई-काजल लगाने से बच्चा बुरी नजर से बचा रहता है यह लोगों की निजी मान्यता है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
मिथ-काजल बच्चे की आंखों की रोशनी तेज करता है।
सच्चाई-यदि ऐसा होता तो दुनियाभर के सभी डॉक्टर उन सभी मरीजों को जिनकी आंखें कमजोर हैं, उन्हें काजल लगाने का सुझाव देते।

रात को ब्रा पहन कर सोना चाहिए या नहीं

रात को सोने से पहले ब्रा उतारना या नहीं इसको लेकर अक्सर महिलाएं सोच में रहती है। जहां कुछ का मानना है कि ब्रा पहनकर सोने से बीमारियां लगने का खतरा होता है। वहीं कई महिलाओं का सोचना है कि इसे रात को पहनने से ब्रेस्ट शेप खराब होती है। ऐसे में आप भी इसे लेकर कंफ्यूजन में है तो चलिए आज हम आपके बताते हैं कि इसपर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं...
डॉक्टर्स व एक्सपर्ट्स के मुताबिक रात को ज्यादा टाइट ब्रा पहनकर सोने से सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती है। ऐसे में इसे रात को ना पहनने में ही भलाई है। मगर फिर भी आप इसे पहनना चाहती है तो इस बात का ध्यान रखें कि ब्रा ज्यादा टाइन हो ढीली।
रात को ब्रा पहनकर सोने से होने वाले नुकसान
ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
रातभर ब्रा पहनकर सोने से ब्रेस्ट के लिए खतरनाक हो सकता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो इससे ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ता है। हालांकि अभी तक इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है मगर माना गया है कि कई घंटे ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।
नर्वस सिस्टम पर गलत असर
रातभर टाइट ब्रा पहनकर सोने से नर्वस सिस्टम पर बुरा प्रभाव पड़ता है। असल में, ब्रा पर लगी तार ब्रेस्ट एरिया के आसपास की मसल्स को सिकोड़ देती है। ऐसे में नर्वस सिस्टम को भी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट के टिश्यू को भी नुकसान पहुंचता है।
फंगल इंफेक्शन का खतरा
लंबे समय से ब्रा पहनने से ब्रेस्ट के आसपास पसीना जमा होने लगता है। ऐसे में उस एरिया पर बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इससे फंगल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। इसके लिए जरूरी है कि रात को इस उतार कर सोएं। साथ ही दिन के समय भी सिंथेटिक से बनी ब्रा पहने। इसे पहनने से आपको ज्यादा पसीना आने की समस्या नहीं होगी। ऐसे में फंगल इंफेक्शन से बचाव रहेगा।
खुजली की परेशानी
ब्रा को दिन के समय ही पहने। इसे दिन और रात दोनों समय पहनने से सिस्ट की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही कई घंटों तक इसे पहनने से त्वचा में खुजली हो सकती है। इसके अलावा और भी स्किन संबंधी समस्याएं हो सकती है।
ब्लड सर्कुलेशन पर पड़ता है असर
रातभर ब्रा पहन कर सोने से शरीर पर खून का दौरा ठीक से नहीं हो पाता है। इसे पहनकर सोने से ब्रेस्ट के आसपास के एरिया में खून का प्रवाह सही ढंग से नहीं हो पाता है। इसके कारण रात को नींद ना आने की परेशानी भी झेलनी पड़ सकती है। ऐसे में अगर आप भी रात को ब्रा पहन कर सोती है तो अपनी इस आदत को बदल लें। नहीं तो ढीली ब्रा पहनकर ही सोएं।

मनोरंजन

See More

सुनील ग्रोवर की एक्टिंग की हुई तारीफ

जी5 पर रिलीज हुई वेब सीरीज ‘सनफ्लावर’ का निर्देशन किया है फिल्मकार विकास बहल ने, जिनका नाम यौन उत्पीड़न के एक केस में सामने आया था. फिलहाल, इस मामले में विकास की छवि साफ हो चुकी है और वह ‘सनफ्लावर’ के साथ एक बार फिर से दर्शकों के लिए मनोरंजक कंटेंट लेकर आए हैं. विकास बहल के साथ इसे राहुल सेनगुप्ता ने भी डायरेक्ट किया है. इस सीरीज की कहानी एक मर्डर मिस्ट्री के ईर्द-गिर्द घूमती है. एक शव और दो संदिग्ध. यह तो स्पष्ट है कि एक शख्स अपनी बातों से संदिग्ध नजर आता है और दूसरा अपनी हरकतों से. क्या ये दोनों संदिग्ध सनफ्लावर सोसायटी में हुई राज कपूर की हत्या में शामिल हैं? क्या वे सिर्फ सामान्य संदिग्ध हैं और जो सामने दिख रहा है, उसके अलावा भी बहुत कुछ है? इस तरह के सवाल वेब सीरीज ‘सनफ्लावर’ देखने के बाद आपके भी जहन में आ सकते हैं. विकास बहल ने इस सीरीज में शुरुआत से ही सस्पेंस क्रिएट करने की कोशिश की है. सुनील ग्रोवर, आशीष विद्यार्थी , रणवीर शौरे जैसे कलाकारों द्वारा निर्मित इस सीरीज से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन क्या उनकी उम्मीदों पर कलाकार खरे उतर पाए और क्या कहती है इस थ्रिलर सीरीज की कहनी, यह सब जानेंगे आज के रिव्यू में.
क्या है सीरीज की कहानी?
रेसिडेंशियल एरिया में पड़ोसियों के साथ झगड़े आम बता हैं, लेकिन अगर इन झगड़ों के चलते किसी की हत्या हो जाए, तो यह कोई आम बात नहीं है. ऐसी ही कहानी है वेब सीरीज ‘सनफ्लावर’ की. मुंबई में एक रेसिडेंशियल सोसायटी है, जिसका नाम सनफ्लावर है. इस सोसायटी में हर वर्ग और हर समुदाय के लोग रहते हैं, जिन्हें एक दूसरे से किसी न किसी वजह से समस्या है. सीरीज की कहानी शुरू होती है एक नारियल पानी से. एक फ्लैट के बाहर नारियल पानी रखा है और एक पड़ोसी उसमें कुछ मिला देता है. वह पड़ोसी है- डॉ. आहूजा (मुकुल चड्ढा), जो एक यूनिवर्सिटी में लेक्चरर है.
उसके सामने वाले फ्लैट में रहते हैं- राज कपूर. अरे रुकिए३ ‘आवारा’ वाले राज कपूर नहीं. सोसायटी वाले राज कपूर तो एक बिजनेसमैन हैं. राज कपूर से उनके पड़ोसी आहूजा का अक्सर किसी न किसी बात पर झगड़ा होता है, खासकर पार्किंग को लेकर. राज कपूर को सबक सिखाने के लिए आहूजा उसके नारियल पानी में कुछ मिला देता है. अब राज कपूर वह नारियल पानी पी लेता है और उसे पीने के बाद वह टॉयलेट पॉट पर बैठा-बैठा ही परलोक सिधार लेता है.
अब सोसायटी में एंट्री होती है पुलिस की. दिगेंद्र (रणवीर शौरे) के नेतृत्व में और तांबे (गिरीश कुलकर्णी) द्वारा इस हत्या की गुत्थी सुलझाने की जद्दोजहद शुरू होती है. संदेह की सुई राज कपूर की घरेलू हाउस हेल्पर और उसके पड़ोसी आहूजा पर जा टिकती है. पुलिस की नजर में सोनू सिंह (सुनील ग्रोवर) सबसे बड़ा संदिग्ध उस समय बन जाता है, जब पुलिस सोसायटी के सीसीटीवी फुटेज में उसकी अजीबों-गरीब हरकतें पकड़ती है.
सोनू, 35 वर्षीय व्यक्ति के शरीर में फंसा हुआ एक किशोर प्रतीत होता है, जिसके साथ महिलाएं लिफ्ट साझा करने में संकोच कर सकती हैं. वह लड़कियों की तरफ आकर्षित होता है, लेकिन उसे कोई भी भाव नहीं देती. हालांकि, जब नौकरी की बात आती है, तो सोनू काम में मेहनती साबित होता है, लेकिन उसमें सामाजिक कौशल का पूरी तरह से अभाव है. एक के बाद एक हत्या के सबूत सोनू सिंह और आहूजा को मुजरिम ठहराने की तरफ इशारा करते हैं. पर ऐसा कुछ है जो पुलिस को इन्हें गिरफ्तार करने से रोकता है? अब वह क्या है, इसके लिए आपको ‘सनफ्लावर’ वेब सीरीज देखनी होगी.
अभिनय
‘सनफ्लावर’ की कहानी थोड़ी बोर करती है, लेकिन इसके किरदार अपने अभिनय से कहानी को दिलचस्प बनाने में कामयाब हुए. सुनील ग्रोवर ने बहुत ही कुशलता के साथ अपने किरदार को निभाया. अक्सर हमने सुनील को हास्य किरदारों में देखा है, लेकिन इस सीरीज में आप उनकी एक्टिंग से काफी हैरान होने वाले हैं. मुकुल चड्डा ने एक लेक्चरर और एक शॉर्ट टेंपर्ड शख्स आहूजा के किरदार को बहुत प्रभावशाली तरीके से निभाया.
रणवीर शौरे ने एक चतुर पुलिस अधिकारी की भूमिका बखूबी निभाई है. सीरीज में कहीं भी रणवीर को स्माइल करते हुए नहीं दिखाया गया. उन्होंने एक ऐसे पुलिस वाले की भूमिका निभाई है, जिसके दिमाग में हत्या की गुत्थी सुलझाने का जुनून सवार रहता है. गिरीश कुलकर्णी ने पुलिस इंस्पेक्टर तांबे के रोल को मजेदार रुख दिया है. एक ऐसा इंस्पेक्टर जिसके पास केस सुलझाने और अपनी महिला मित्रों को देने का पूरा समय है.
वहीं, आशीष विद्यार्थी की बात करें, तो एक सोसायटी के सदस्य के रूप में वह हर किसी को अपनी नजरों से नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए नजर आते हैं. वह सोसायटी के चेयरमैन बनना चाहते हैं. एक ऐसा चेयरमैन जिसके नेतृत्व में मुस्लिमों, समलैंगिकों, किन्नरों और दो-तीन शादी कर चुके लोगों के लिए सोसायटी में कोई जगह नहीं है. इस सीरीज में हर किरदार को किसी न किसी प्रकार से अलग दिखाने की बखूबी कोशिश की गई और सभी कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया.

Read More

यू. पी राज्य

See More

अंतिम संस्कार और एंबुलेंस सेवाओं के रेट तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार

अंतिम संस्कार और एंबुलेंस सेवाओं के रेट तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार

श्याम बाबू गुप्ता ब्यूरो चीफ , परिधि समाचार, अलीगढ़

कोरोना महामारी के दौरान अंतिम संस्कार और एंबुलेंस सेवाओं के लिए कथित रूप से अधिक शुल्क लिए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दे कि वे एंबुलेंस सेवाओं और कोरोना संक्रमण से मरने वालों के अंतिम संस्कार के शुल्क निर्धारण के लिए जल्द से जल्द दिशानिर्देश तैयार करें। जिसका अनुपालन न करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रविधान हो। गैर-सरकारी संगठन डिस्ट्रेस मैनेजमेंट कलेक्टिव द्वारा अधिवक्ता जोस अब्राहम के जरिये दाखिल याचिका में मृतकों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र को नीति बनाने पर विचार करने के निर्देश देने की मांग भी की गई है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी हाल में मृतकों की गरिमा बरकरार रखने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। लेकिन इस मसले से निपटने के लिए अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला भी दिया गया है जिसमें कहा गया था कि मृतक की गरिमा बरकरार रखी जानी चाहिए और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

 

Read More

खेल

See More

टी20 विश्व कप में 100 फीसदी फिट होकर करेंगे ये काम


हार्दिक पंड्या बतौर ऑलराउंडर टीम में खेलते हैं, लेकिन बीते कुछ महीनों में उनका गेंदबाजी न करना चर्चा का विषय बना हुआ है. इसका करण उनकी फिटनेस है जिसके चलते वह गेंदबाजी नहीं कर पा रहे हैं. पीठ की समस्या और कंधे की चोट से पंड्या काफी परेशान रहे हैं. उन्होंने आईपीएल-2021 के स्थगित होने तक गेंदबाजी नहीं की थी. वह कब इंटरनेशल स्तर पर गेंदबाजी करेंगे ये बात चर्चा का विषय है. पंड्या को श्रीलंका दौरे के लिए टीम में चुना गया है. इसी साल टी20 विश्व कप भी होना है और पंड्या को पता है कि उन्हें टीम में अपना योगदान देना होगा, सिर्फ बल्ले से नहीं बल्कि गेंद से भी और उनका पूरा ध्यान टी20 विश्व कप पर ही है.
पंड्या आईसीसी टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते हैं. बायो-बबल में लगातार अंदर-बाहर हो रहे पंड्या काफी मेहनत कर रहे हैं. उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया पोडकास्ट पर कहा, “मेरे लिए, मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं और मैं ऐसा कर सकूंगा, कि मैं टी20 विश्व कप के सभी मैचों में गेंदबाजी करूंगा. मैं बस थोड़ा स्मार्ट बनने की कोशिश कर रहा हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं इसे मिस न करूं. मेरा पूरा ध्यान विश्व कप पर है.”
पूरी तरह से फिट रहने की जरूरत
पंड्या को पता है कि उन्हें अपने चार ओवर अच्छे से करने के लिए पूरी तरह से फिट रहना होगा. उन्होंने इस बात को माना कि उनके लिए फिट रहना काफी अहम होगा. पंड्या ने कहा, “हां, गेंदबाजी को लेकर, मायने रखता है कि मैं कितना फिट हूं. मेरी सर्जरी के बाद भी, मैंने अपनी गति नहीं खोई है. मेरी गेंदबाजी मेरी फिटनेस से संबंधित है. मैं जितना फिट रहूंगा मैं उतना बेहतर कर सकूंगा. मैं जब भी खेलना चाहता हूं, पूरा 100 फीसदी फिट होकर खेलना चाहता हूं, 50 फीसदी फिट रहते हुए नहीं.”
आईपीएल-2021 में नहीं की गेंदबाजी
पंड्या ने आईपीएल-2021 में एक भी गेंद नहीं फेंकी. यह बताता है कि उन्हें गेंदबाजी करने में समस्या आ रही है. वह साथ ही बल्ले से भी कुछ खास नहीं कर पाए. आईपीएल-2021 स्थगित होने से पहले पंड्या ने सात मैच खेले और 8.66 की औसत से सिर्फ 52 रन बनाए. 
पंड्या वैसे भी लंबे अरसे से टेस्ट नहीं खेले हैं. उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ 30 अगस्त से 2 सितंबर के बीच साउथैम्पटन में खेला था. तब से टेस्ट मैच नहीं खेले हैं. उन्होंने अभी तक भारत के लिए 11 टेस्ट मैच खेले हैं और 17 विकेट के साथ 532 रन बनाए हैं.

Read More

नेशनल

See More

कोरोना से माता-पिता को खोने वाले बच्चों के संरक्षक बनेंगे डीएम,

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मुताबिक अब तक पूरे देश में 1700 से ज्यादा बच्चे कोरोना की वजह से अनाथ हो गए हैं. पिछले दिनों सरकार ने इनके भविष्य के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया था.
नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने कोरोना से प्रभावित बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. इनमें राज्यों, जिलाधिकारियों, पुलिस, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं. सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव राम मोहन मिश्रा ने एक पत्र लिखा है. उन्होंने बुधवार को कहा कि जो कदम उठाये जा रहे हैं, उन्हें मुख्यधारा में लाने और सुगम बनाने के लिहाज से प्राथमिक कर्तव्य वाले लोगों की प्रमुख जिम्मेदारियां निर्धारित की गयी हैं. इससे महामारी के दौरान बच्चों का सर्वश्रेष्ठ हित सुनिश्चित किया जा सकेगा.
यह दिशानिर्देश किए गए जारी
मिश्रा ने राज्यों, जिलाधिकारियों, पुलिस, पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों की भूमिकाएं निर्धारित करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए. राज्यों को सर्वेक्षण और संपर्क के माध्यम से संकटग्रस्त बच्चों का पता लगाना होगा और हर बच्चे के प्रोफाइल के साथ डाटाबेस तैयार करना होगा। उन्हें बच्चों की विशेष जरूरतों का विवरण भी लिखना होगा और इसे ट्रैक चाइल्ड पोर्टल पर अपलोड करना होगा.मिश्रा ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा कि बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) को अस्थायी रूप से ऐसे बच्चों को रखने की जिम्मेदारी दी जाए जिनके माता-पिता कोविड-19 के कारण अस्वस्थ हैं और उनके परिवार में अन्य कोई संबंधी नहीं है. ऐसे बच्चों को जरूरी मदद दी जाए. केंद्रीय अधिकारी ने राज्यों से एक स्थानीय हेल्पलाइन नंबर भी जारी करने को कहा जिस पर विशेषज्ञ परेशानी से जूझ रहे बच्चों को मनोवैज्ञानिक सहयोग दे सकें.
 उन्होंने कहा कि कोविड से बुरी तरह प्रभावित बच्चों के संरक्षक की भूमिका जिलाधिकारी (डीएम) निभाएंगे.
इतने बच्चों की जिंदगी कोरोना से हुई प्रभावित
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में कहा कि राज्यों से मिले आंकड़ों के मुताबिक देश में 9346 बच्चे ऐसे हैं जो कोरोना संक्रमण की वजह से अपने माता-पिता में से किसी एक को खो चुके हैं. इनमें 1700 से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हो गई.

Read More

Videos

See More