September 20 ,2021

PS24 News
मीडिया का नया अवतार
हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2015/65733 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2016/71238 (दैनिक)
RNI - UPHIN/2017/75145 (मासिक)
Download App

नेशनल

डेल्टा प्लस को लेकर सरकार अलर्ट-योगी


बाहर से आने वालों पर पैनी निगाह, जीनोम सिक्वेंसिंग आवश्यक
लखनऊ 25 जून।कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार वायरस के नये वैरिएंट डेल्टा प्लस को लेकर सतर्क है।  इससे बचाव के लिये उठाये जा रहे कदमों के तहत बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की जीनोम सिक्वेंसिंग पर अधिक जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शुक्रवार को कोविड-19 प्रबंधन के लिये गठित टीम-09 की बैठक में कहा कि कई राज्यों में कोरोना वायरस के नये वैरिएंट ‘डेल्टा प्लस’ से संक्रमित मरीज पाए गये हैं। उत्तर प्रदेश को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार का वैरिएंट पहले की अपेक्षा कहीं अधिक खतरनाक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ परामर्श समिति ने बचाव के लिए अनुशंसा रिपोर्ट तैयार की है जिसके अनुसार  अन्य आयु के लोगों की अपेक्षा बच्चों पर अधिक दुष्प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों के परामर्श के अनुरूप बिना देर किए जरूरी कदम उठाए जाएं। लोगों को सही जानकारी प्राप्त हो इसके लिए राज्य स्तरीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ परामर्श समिति के सदस्यों व अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों के माध्यम से जन जागरूकता के प्रयास किए जाएं। मीडिया से भी सहयोग लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के डेल्टा प्लस वैरिएंट की गहन पड़ताल के लिए अधिकाधिक सैम्पल की जीनोम सिक्वेंसिंग कराई जाए। रेलवे, बस , वायु मार्ग से प्रदेश में आ रहे लोगों के सैम्पल लेकर सिक्वेंसिंग कराई जानी चाहिए। जिलों से भी सैम्पल लिए जाएं। रिजल्ट के अनुसार डेल्टा प्लस प्रभावी क्षेत्रों की मैपिंग कराई जाए। इससे बचाव के प्रयासों में सुविधा होगी। प्रदेश में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा के लिए केजीएमयू और बीएचयू में आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं।विगत दिनों कराये गए सीरो सर्वे के प्रारंभिक परिणाम अच्छे संकेत देने वाले हैं। शुरुआती नतीजों के मुताबिक सर्वेक्षण में लोगों में हाई लेवल एंटीबॉडी की पुष्टि हुई है।  वायरस से इस लड़ाई में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। डबल मास्क, सैनिटाइजेशन, दो गज की दूरी जैसे कोविड बचाव संबंधी व्यवहार को हमें अपनी जीवनशैली में शामिल करना ही होगा। भीड़भाड़ से बचें। थोड़ी लापरवाही, बहुत भारी पड़ सकती है।  कोरोना से बचाव के लिए टीका-कवर उपयोगी है। जून माह में हमने एक करोड़ प्रदेशवासियों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा था, 24 जून को 06 दिन शेष रहते ही, इस लक्ष्य को पूर्ण कर लिया गया। उत्तर प्रदेश में अब तक 02 करोड़ 90 लाख से अधिक वैक्सीन डोज लगाए जा चुके हैं। करीब 42 लाख लोगों ने टीके के दोनों डोज प्राप्त कर लिए हैं।  आगामी 01 जुलाई से हर दिन न्यूनतम 10 लाख लोगों को टीका-कवर देने के लक्ष्य के साथ काम किया जाए। विकास खंडों को क्लस्टर में बांटकर वैक्सीनेशन की हमारी नीति के अच्छे परिणाम मिले हैं। अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह एक तिहाई विकास खंडों में लागू है, 01 जुलाई से इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाए। कोरोना महामारी के दृष्टिगत प्रदेश की स्थिति हर दिन के साथ बेहतर होती जा रही है। संक्रमण दर 0.1 परसेंट से भी कम स्तर पर आ चुका है, जबकि रिकवरी दर 98.5 फीसदी है। ज्यादातर जिलों में संक्रमण के नए केस इकाई अंकों में आ रहे हैं, तो 50-52 से अधिक जिलों में 50 से कम एक्टिव केस ही हैं। वर्तमान में कुल एक्टिव केस घटकर 3,423 रह गए हैं। 2,078 लोग होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं। अब तक कुल 16 लाख 79 हजार 416 प्रदेशवासी कोरोना से लड़ाई जीत कर स्वस्थ हो चुके हैं। 24 घंटे में एक ओर जहां 02 लाख 69 हजार 272 सैम्पल टेस्ट हुए, वहीं मात्र 226 नए पॉजिटिव केस आये और 320 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी हुए। उत्तर प्रदेश में अब तक 05 करोड़ 65 लाख 40 हज़ार 503 कोविड टेस्ट हो चुके हैं। विशेष पदों को छोड़कर, अस्पताल प्रशासन  प्रबंधन में चिकित्सकों की तैनाती अपरिहार्य स्थिति में की जानी चाहिए। चिकित्सक का प्रथम और प्रमुख कार्य मरीज का उपचार करना है, उन्होंने इसी सेवा के लिए अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अन्य कार्यों में उनकी तैनाती, चिकित्सकों को उनके मूल कर्तव्य से विमुख करती है। अस्पताल प्रशासन प्रबंधन के कार्यों के लिए मास्टर इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन अथवा हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमबीए उपाधिधारक युवाओं को अवसर दिया जाना चाहिए। इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए।  उत्तर प्रदेश ऑक्सीजन जेनेरेशन के क्षेत्र में आफत्मनिर्भर हो रहा है। कल 05 और प्लांट की स्वीकृति दी गई है। अब 114 ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील हो चुके हैं। भारत सरकार के सहयोग से पीएम केयर्स के माध्यम से निर्माणाधीन ऑक्सीजन प्लांट्स को 15 अगस्त तक क्रियाशील कर लिया जाए। मॉनीटरिंग के लिए नोडल अधिकारी तैनात किया जाए। प्लांट स्थापना से जुड़े कार्यों की सतत समीक्षा की जाए।

Read More

कोरोना से माता-पिता को खोने वाले बच्चों के संरक्षक बनेंगे डीएम,

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मुताबिक अब तक पूरे देश में 1700 से ज्यादा बच्चे कोरोना की वजह से अनाथ हो गए हैं. पिछले दिनों सरकार ने इनके भविष्य के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया था.
नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने कोरोना से प्रभावित बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. इनमें राज्यों, जिलाधिकारियों, पुलिस, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं. सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव राम मोहन मिश्रा ने एक पत्र लिखा है. उन्होंने बुधवार को कहा कि जो कदम उठाये जा रहे हैं, उन्हें मुख्यधारा में लाने और सुगम बनाने के लिहाज से प्राथमिक कर्तव्य वाले लोगों की प्रमुख जिम्मेदारियां निर्धारित की गयी हैं. इससे महामारी के दौरान बच्चों का सर्वश्रेष्ठ हित सुनिश्चित किया जा सकेगा.
यह दिशानिर्देश किए गए जारी
मिश्रा ने राज्यों, जिलाधिकारियों, पुलिस, पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों की भूमिकाएं निर्धारित करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए. राज्यों को सर्वेक्षण और संपर्क के माध्यम से संकटग्रस्त बच्चों का पता लगाना होगा और हर बच्चे के प्रोफाइल के साथ डाटाबेस तैयार करना होगा। उन्हें बच्चों की विशेष जरूरतों का विवरण भी लिखना होगा और इसे ट्रैक चाइल्ड पोर्टल पर अपलोड करना होगा.मिश्रा ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा कि बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) को अस्थायी रूप से ऐसे बच्चों को रखने की जिम्मेदारी दी जाए जिनके माता-पिता कोविड-19 के कारण अस्वस्थ हैं और उनके परिवार में अन्य कोई संबंधी नहीं है. ऐसे बच्चों को जरूरी मदद दी जाए. केंद्रीय अधिकारी ने राज्यों से एक स्थानीय हेल्पलाइन नंबर भी जारी करने को कहा जिस पर विशेषज्ञ परेशानी से जूझ रहे बच्चों को मनोवैज्ञानिक सहयोग दे सकें.
 उन्होंने कहा कि कोविड से बुरी तरह प्रभावित बच्चों के संरक्षक की भूमिका जिलाधिकारी (डीएम) निभाएंगे.
इतने बच्चों की जिंदगी कोरोना से हुई प्रभावित
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में कहा कि राज्यों से मिले आंकड़ों के मुताबिक देश में 9346 बच्चे ऐसे हैं जो कोरोना संक्रमण की वजह से अपने माता-पिता में से किसी एक को खो चुके हैं. इनमें 1700 से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हो गई.

Read More

अपरा एकादशी व्रत की तिथि पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


इस साल 6 जून, रविवार के दिन अपरा एकादशी का व्रत पड़ रहा है. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है. मान्यताओं के मुताबिक, एकादशी का व्रत करने विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है. घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है. इसके साथ ही भक्तों को समाज में यश मिलता है. अपरा एकादशी को अचला, जलक्रीड़ा भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष को एकादशी के दिन अपरा एकादशी का योग माना गया है.
अपरा एकादशी शुभ मुहूर्त
अपरा एकादशी तिथि प्रारंभ- 05 जून 2021 को शाम 04 बजकर 07 मिनट से
अपरा एकादशी तिथि का समापन- जून 06, 2021 को सुबह 06 बजकर 19 मिनट पर। अपरा एकादशी व्रत पारण मुहूर्त- 07 जून 2021 को सुबह 05 बजकर 12 से सुबह 07ः59 तक
अपरा एकादशी पूजा विधि
अपरा एकदाशी व्रत के एक दिन पहले रात में खाना खाने के बाद अच्छे से ब्रश कर के मुंह को साफ कर लें. इसके बाद भोजन को ग्रहण न करें. साथी के साथ शारीरिक संबंध न बनाएं. अब एकादशी के दिन प्रातरूकाल उठकर स्नान करें साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें. अब पूजाघर या मंदिर का साफ कर के गंगाजल से शुद्ध कर लें. भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें. इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा शुरू करें. संभव हो तो पंडित जी को घर बुलाकर एकदशी व्रत की कथा सुनें. आसन लगाकर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति स्थापित करें. विष्णु जी को चंदन का टीका लगाएं. अब पीले फूल, तुलसी, सुपारी, लौंग, धूप-दीप से पूजा करें. विष्णु जी को पंचामृत, मिठाई फलों का भोग लगाएं. भगवान विष्णु की आरती करें. ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमरूश् का जाप करें विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी करें। इस दिन भोजन में केवल फलाहार लें.
अपरा एकादशी का महत्त्व
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान श्री श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने अपरा एकादशी का व्रत किया था, जिससे उनकी महाभारत के युद्ध में विजय हुई थी. साथ ही मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से भक्त के सभी दुख दूर होते हैं उसके सभी पापों का अंत होता है. ऐसा भी कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या, भूत योनि, दूसरे की निंदा, झूठ बोलना, झूठे शास्त्र पढ़ना आदि सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं.

Read More

सिंगापुर की कंपनी ने अपने सभी कर्मचारियों (सी मैन) को लगवा रही मुफ्त कोविड वैक्सीन ।

ईगलस्टार शिप मैनेजमेंट (सिंगापुर) अपने सभी शिप पर जो अमेरिकन पोर्ट (बंदरगाह) पर है, उन शिपो पर अपने सभी कर्मचारियों को जॉनशन एंड जॉनशन (जो कि केवल एक डोज़ है) टिका (वैक्सीन) लगवा रही है, कोविड वैक्सीन का सारा खर्चा कम्पनी खुद उठा रही है। टिका लगवाने वाले में भारत से अभिपरिचय पाण्डेय(जिलाअध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन रजि0 नई दिल्ली), रोहित सिंह, अमित सिंह, मनोज गैरोला, शिवशंकर सुब्रमण्यम सहित दूसरे देश के लोग शामिल हुये।
Read More

कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए मोदी सरकार का ऐलान


कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए मोदी सरकार का ऐलान, पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपए की मदद और 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा, पढ़ाई का खर्च भी दिया जाएगा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि कोरोना के कारण माता-पिता या अभिभावक दोनों को खोने वाले सभी बच्चों को पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि कोरोना के कारण माता-पिता या अभिभावक दोनों को खोने वाले सभी बच्चों को च्ड केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत मदद दी जाएगी। देश में कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए केंद्र सरकार ने शनिवार को बड़ा ऐलान किया। ऐसे बच्चों को च्ड केयर्स फंड से 10 लाख रुपए की मदद दी जाएगी। उनकी पढ़ाई का खर्च भी इसी फंड से उठाया जाएगा। 18 साल की उम्र तक हर महीने आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा उनकी उम्र 23 साल होने पर भी 10 लाख रुपए की सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि कोरोना के कारण माता-पिता या अभिभावक दोनों को खोने वाले सभी बच्चों को च्ड केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत मदद दी जाएगी।इन बच्चों को आयुष्यमान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। इसका प्रीमियम पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा। हायर एजुकेशन के लिए अगर लोन लिया है तो उसमें राहत दी जाएगी। इस लोन का ब्याज भी इसी फंड से दिया जाएगा।
दिल्ली में 1 हजार से कम नए केस मिले
दिल्ली में 2 महीने बाद एक दिन में कोरोना के एक हजार से कम केस मिले हैं। यहां शनिवार को 956 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इससे पहले 22 मार्च को 888 केस मिले थे। इसके बाद से लगातार नए केस बढ़ते गए। यह संख्या 30 अप्रैल को 27 हजार तक पहुंच गई थी। इसके बाद से नए मामलों में कमी आ रही है। बीते 24 घंटों में यहां 122 लोगों की संक्रमण से मौत हो गई। पॉजिटिविटी रेट भी गिरकर 1.19ः पर आ गया है। दूसरी लहर के पीक पर यह 32ः तक पहुंच गया था। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में कहा गया है कि दिल्ली में कोरोना से मरने वालों की संख्या 24,073 हो गई है। गुरुवार को यहां 1,072 नए केस और 117 मौतें दर्ज की गई थीं।
19 राज्यों में लॉकडाउन जैसी पाबंदियां
देश के 19 राज्यों में पूर्ण लॉकडाउन जैसी पाबंदियां हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मिजोरम, गोवा, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी शामिल हैं। यहां पिछले लॉकडाउन जैसे ही कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आंशिक लॉकडाउन
देश के 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंशिक लॉकडाउन है। यहां पाबंदियां तो हैं, लेकिन छूट भी है। इनमें पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, नगालैंड, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।

Read More

ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्ट ऑफिस भी करेंगे कोविड टीकाकरण के लिये रजिस्ट्रेशन

 

कानपुर। बैक्सीनेशन के लिए अब पोस्ट आफिस में भी पंजीकरण और अपॉइंटमेंट किया जायेगा।यह जानकारी देते हुए पीएमजी वाराणसी कृष्ण कुमार यादव बताया कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के गोराईं शाखा डाकघर में सेवा आरम्भ हुई । शीघ्र ही 300 अन्य शाखा डाकघरों में भी शुरुआत होने जा रही है।
कोरोना महामारी के प्रकोप से बचाव हेतु टीकाकरण बेहद जरुरी है। पर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोगों के पास स्मार्ट फोन न होने के कारण वे टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन व अप्वाइंटमेंट नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में डाक विभाग अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित शाखा डाकघरों के माध्यम से लोगों का टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करेगा, जहाँ पर पोस्ट ऑफिस कॉमन सर्विस सेंटर खोले जायेंगे। इसके लिए डाकघरों का चयन और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया आरम्भ हो गई है।  श्री यादव ने बताया कि शाखा डाकघरों में टीकाकरण के लिए पोस्ट ऑफिस कॉमन सर्विस सेंटर खोलने की कवायद आरम्भ हो गई है। ये मोबाइल एप के माध्यम से वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन और एप्वाइनमेंट का कार्य को-विन एप्लिकेशन के माध्यम से करेंगे, जिसके लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया जायेगा। लोगों को निर्धारित फोटो आईडी और मोबाइल के साथ शाखा डाकघर पहुँचना होगा, जहाँ पर ओटीपी के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मॉडल ब्लॉक के तौर पर विकसित किये जा रहे सेवापुरी ब्लॉक में मिर्जामुराद उप डाकघर के अधीन गोराईं शाखा डाकघर में वैक्सीनेशन रजिस्ट्रेशन व एप्वाइनमेंट का शुभारम्भ कर दिया गया है, जहाँ 25 से ज्यादा लोगों ने टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करा भी लिया है। शीघ्र ही वाराणसी परिक्षेत्र के 300 अन्य शाखा डाकघरों में भी इसे आरम्भ किया जायेगा। इसमें वाराणसी के 73, चंदौली के 26, भदोही के 21, जौनपुर के 60, गाजीपुर के 60 और बलिया के 60 शाखा डाकघर शामिल हैं। इसके बाद अगले फेज में 475 और भी शाखा डाकघरों में इसे आरम्भ करने की योजना है।
0000

Read More

कोरोना ट्रीटमेंट से रेमडेसिविर को भी जल्द हटाने पर चल रहा विचार

देश में कोरोना संक्रमण के इलाज को लेकर अब कई नये शोध सामने आ रहे हैं. देश में लंबे समये से कोरोना संक्रमण से लड़ने में कारगर मानी जाने वाली प्लाज्मा थेरेपी के बाद अब कोरोना के इलाज से रेमडेसिविर को भी हटाने पर विचार किया जा रहा है.

प्लाज्मा थेरेपी को कोरोना के इलाज से हटाने के फैसले के बाद जल्द ही अब रेमडेसिविर इंजेक्शन को भी हटाने पर जल्द फैसला लिया जा सकता है. दिल्ली में सर गंगाराम अस्पताल के चेयरपर्सन डॉ. डीएस राना ने मंगलवार को कहा कि कोरोना ट्रीटमेंट से रेमडेसिविर को भी जल्द हटाने पर विचार चल रहा है.

कोरोना संक्रमित मरीजों पर इसके बेहतर प्रभाव को लेकर कोई सबूत सामने नहीं आये हैं. इसलिए इस दवा को कारगर नहीं माना जा सकता. ICMR की अडवाइजरी पर प्लाज्मा थेरेपी को कोरोना ट्रीटमेंट से हटा दिया गया है और अब पूरी संभावना है कि रेमडेसिविर को भी इससे हटा दिया जाये.

कोरोना संक्रमण के दौरान प्लाज्मा थेरेपी और रेमडेसिविर दोनों की डिमांड इतनी बढ़ गयी थी कि केंद्र सहित कई राज्य सरकारों ने कोरोना संक्रमितों को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए जागरुकता अभियान चलाया था. दूसरी तरफ रेमडेसिविर की डिमांड इतनी ज्यादा तेज हो गयी थी कि इस दवा की मांग ब्लैक मार्केट में बढ़ गयी थी सरकार को इसकी कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े फैसले लेने पड़े साथ ही कंपनी को इसकी डिमांड पूरी करने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर देना पड़ा. कंपनी रेमडेसिविर के उत्पादन पर फोकस कर रही है.

रेमडेसिविर की लगातार बढ़ती मांग पर इस नये बयान का क्या असर पड़ेगा कहना मुश्किल है, हालांकि पर भी केंद्र सरकार ने यह बयान जारी किया था कि रेमडेसिविर कोरोना संक्रमण के इलाज में खास कारगर नहीं है, इसके बावजूद भी दवा की मांग पर इसका खास असर नहीं हुआ. सरकार ने इसके बाद दवा की कालाबाजारी को रोकने के लिए इसके इस्तेमाल को लेकर नियम बनाये, अस्पतालों में कैसे इसका इस्तेमाल होगा, क्या रणनीति होगी इसे तय किया

Read More

पत्रकारों पर भरी पड़ रहा कोरोना अब तक 300 से ज्यादा गंवा चुके जान, मुसीबत बनी दूसरी लहर

हर रोज चार पत्रकारों का निधन हुआ है
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे रिपोर्टरों और लगातार ऑफिस जा रहे पत्रकारों को न तो फ्रंट लाइन वर्कर माना गया और न ही उनको वैक्सीन में प्राथमिकता मिली. परिणाम ये हुआ कि कई नामी गिरामी पत्रकारों सहित अलग-अलग राज्यों में 300 से ज्यादा मीडियाकर्मी कोरोना की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं.
कोरोना वायरस के कहर से पिछले साल बड़ी संख्या में फ्रंट लाइन वर्कर जैसे डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मियों को जान गंवानी पड़ी. यही वजह रही कि देश में जब वैक्सीन लगनी शुरू हुई तो सबसे पहले इन्हें ही प्राथमिकता दी गई. इसका अच्छा असर भी हुआ. कोरोना की दूसरी लहर में जान गंवाने वालों में इन  फ्रंटलाइन वर्कर्स की संख्या अपेक्षाकृत कम रही. हालांकि मीडियाकर्मी इतने भाग्यशाली नहीं रहे.
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे रिपोर्टरों और लगातार ऑफिस जा रहे पत्रकारों को न तो फ्रंट लाइन वर्कर माना गया और न ही उनको वैक्सीन में प्राथमिकता मिली. परिणाम ये हुआ कि कई नामी गिरामी पत्रकारों सहित अलग-अलग राज्यों में 300 से ज्यादा मीडियाकर्मी कोरोना की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं. इसे त्रासदी ही कहेंगे कि अप्रैल के महीने में हर रोज औसतन तीन पत्रकारों ने कोरोना के चलते दम तोड़ा. मई में यह औसत बढ़कर हर रोज चार का हो गया. 
कोरोना की दूसरी लहर में देश ने कई वरिष्ठ पत्रकारों को खो दिया. जिले, कस्बे, गांवों में काम कर रहे तमाम पत्रकार भी इस जानलेवा वायरस के सामने हार गए. दिल्ली आधारित इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2020 से 16 मई 2021 तक कोरोना संक्रमण से कुल 238 पत्रकारों की मौत हो चुकी  है. 
मई के महीने में हर रोज चार पत्रकारों ने दम तोड़ा

रिपोर्ट बताती है कि कोरोना की पहली लहर में अप्रैल 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक 56 पत्रकारों की मौत हुई लेकिन दूसरी लहर ज्यादा भयावह साबित हुई. 1 अप्रैल 2021 से 16 मई की बीच 171 पत्रकारों ने दम तोड़ दिया. शेष 11 पत्रकारों का निधन जनवरी से अप्रैल के बीच हुआ. 
इंस्टीट्यूट के रिकॉर्ड में 82 पत्रकारों के नाम और हैं, जिनका वेरीफिकेशन नहीं हो सका है. नेटवर्क ऑफ वुमन इन मीडिया, इंडिया के मुताबिक भी करीब 300 पत्रकारों की मौत कोरोना संक्रमण के चलते हुई है. इसका एक गूगल डॉक्यूमेंट ट्विटर पर खूब शेयर हो रहा है. 
कोरोना से 300 से ज्यादा पत्रकारों का निधन हुआ
इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की रिपोर्ट में उन सभी पत्रकारों को शामिल किया गया है जो फील्ड में खबर एकत्रित करते हुए अथवा दफ्तरों में काम करते हुए कोरोना संक्रमित हुए और उनकी जान चली गई. इनमें मीडिया संस्थानों के रिपोर्टर से लेकर, स्ट्रिंगर, फ्रीलांसर, फोटो जर्नलिस्ट और सिटिजन जर्नलिस्ट तक शामिल हैं.
इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ कोटा नीलिमा ने बताया कि कोरोना से अभी तक 300 से ज्यादा पत्रकारों का निधन हुआ है, जिनमें से हम अभी तक 238 को वेरीफाई कर पाए हैं. बाकी के बारे में जांच जारी है.
कोरोना से यूपी में 37 पत्रकारों की मौत हुई

उनके डेटा के मुताबिक, उत्तर भारत में सबसे ज्यादा 37 पत्रकारों की मौत उत्तर प्रदेश में हुई जबकि दक्षिण भारत में तेलंगाना में सबसे अधिक 39 पत्रकारों की मौत कोरोना से हो चुकी है. इसके बाद दिल्ली में 30, महाराष्ट्र में 24, ओडिशा में 26, मध्य प्रदेश  में 19 पत्रकारों की मौत हुई है. इनमें 82 अनवेरिफाई मौतें शामिल नहीं हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक 41 से 50 साल के बीच के पत्रकार सबसे ज्यादा कोरोना के शिकार बने. कुल मौतों में इनका आंकड़ा करीब 31 फीसदी है. 31 से 40 साल के बीच  के 15 फीसदी, 51 से 60 साल के बीच के 19 फीसदी, 61 से 70 साल के 24 फीसदी और 71 साल से ऊपर वाले 9 फीसदी पत्रकारों का कोरोना से निधन हुआ है.
छोटे शहरो के पत्रकार कोरोना के शिकार बने

कोरोना संक्रमण से मरने वाले पत्रकारों में करीब 55 फीसदी प्रिंट मीडिया से, 25 फीसदी टीवी और डिजिटल मीडियातथा 19 फीसदी फ्रीलांस पत्रकारिता से जुड़े थे.
इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ कोटा नीलिमा बताती हैं कि कोरोना संक्रमण से जिन पत्रकारों की मौत हुई है, उनमें 35 फीसदी यानी 85 पत्रकार मेट्रो शहरों से हैं  जबकि 64 फीसदी यानी 153 पत्रकार नॉन-मेट्रो शहरों से, जो जिले, कस्बे और ग्रामीण इलाके से आते हैं. डॉक्टर नीलिमा खुद भी पत्रकार रही हैं और उन्होंने ये आंकड़े अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खबरों से एकत्र कर वेरिफाई किए हैं.  
प्रेस काउंसिल की पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करने की मांग 
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य आनंद राणा ने बताया कि पिछले साल सितंबर में प्रेस काउंसिल की बैठक में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करने की मांग उठी थी.  इसके बाद काउंसिल के सेक्रेटरी ने सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखा था. इसके अलावा इस साल अप्रैल में भी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने राज्य सरकारों को दोबारा पत्र लिखा. इसके लिए हरियाणा के मॉडल पर पत्रकारो पर पत्रकारों का हेल्थ बीमा कराने का फॉर्मूला भी रखा गया, जिसमें राज्य सरकार 5 लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर देती है. 
आनंद राणा ने बताया कि करीब 16 राज्य सरकारों ने पत्रकारों को फ्रंटलाइन वॉरियर्स घोषित कर दिया है, जिनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार, तमिलनाडु, मणिपुर, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और केरल शामिल हैं. 
ओडिशा सरकार ने पत्रकारों के निधन पर 15 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है तो राजस्थान सरकार ने 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है. वहीं, यूपी सरकार भी 5 लाख रुपये देती है. हालांकि सीमित संसाधन का हवाला देते हुए राणा पत्रकारों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं जुटा पाने की बात कहते हैं.

Read More

ममता बनर्जी के भाई असीम बनर्जी की कोरोना से मौत, थे कोरोना संक्रमित

एक महीने से कोलकाता के प्राइवेट हॉस्पिटल में चल रहा था इलाज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सगे भाई की कोरोना के संक्रमण से मौत हो गयी है. वह एक महीने से बीमार थे और कोलकाता के प्राइवेडट हॉस्पिटल मेडिका में उनका इलाज चल रहा था. असीम बंद्योपाध्याय की मृत्यु के बाद से कालीघाट इलाका के अलावा तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के परिवार में शोक की लहर दौड़ गयी.

कोलकाता स्थित मेडिका सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ आलोक राय ने शनिवार को यह जानकारी दी. डॉ राय ने बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छोटे भाई असीम बनर्जी का शनिवार (15 मई) को निधन हो गया है. उनमे कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी. अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था.

शनिवार को ही दोपहर बाद ममता बनर्जी के मंझले भाई असीम बंद्योपाध्याय का कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नीमतला श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया जायेगा. बंगाल में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. दो दिन से लगातार करीब 21 हजार लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो रही है. सवा सौ से ज्यादा लोगों की हर दिन कोविड19 की वजह से मौत हो रही है.

 

Read More

आपने को खोने का दर्द महसूस करता हूं, - पीएम मोदी, देशवासियों से वैक्सीन लेने की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज किसान सम्मान निधी योजना के तहत करीब 19 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर किये. इस दौरान उन्होंने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले, देश के हालात और वैक्सीन से बचाव के उपायों का जिक्र किया.

प्रधानमंत्री की इस योजना के जरिये किसानों को 6000 रुपए प्रति वर्ष का वित्तीय लाभ दिया जाता है. इसे चार-चार महीने की अवधि में 2000 रुपए की तीन समान किस्तों में दिया जाता है. प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा, आज बंगाल के लाखों किसानों तक योजना की पहली किस्त पहुंची है. आज अक्षय तृतिया का पावन पर्व है, कृषि के नए चक्र की शुरुआत का समय है और आज ही करीब 19 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए हैं.

प्रधानमंत्री ने कोरोना की मुश्किल चुनौतियों के बीच किसानों की तारीफ करते हुए कहा, किसानों ने कृषि और बागवानी में रिकॉर्ड उत्पादन किया है, वहीं सरकार भी हर साल MSP पर खरीद के नये रिकॉर्ड बना रही है.

प्रधानमंत्री ने कोरोना संक्रमण का जिक्र करते हुए कहा, 100 साल बाद आई इतनी भीषण महामारी कदम-कदम पर दुनिया की परीक्षा ले रही है. हमारे सामने एक अदृश्य दुश्मन है. हमने बहुत से अपनों को खोया है, जो कष्ट देशवासियो ने सहा है,अनेको लोग जिस दर्द से गुजरे है, तकलीफ से गुजरे है, मैं भी उतना ही महसूस कर रहा हूं.

प्रधानमंत्री ने वैक्सीन के महत्व का जिक्र करते हुए कहा, मुफ्त में वैक्सीनेशन हो रहा है जब भी मौका मिले आप वैक्सीन जरूर लगवा लें. बचाव का एक बहुत बड़ा माध्यम है, कोरोना का टीका. केंद्र सरकार और सारी राज्य सरकारें मिलकर ये निरंतर प्रयास कर रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा देशवासियों को तेज़ी से टीका लग पाए. देशभर में अभी तक करीब 18 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी है.

Read More